Bihar Board 12th History Top-5 Question 2024: सभी स्टूडेंट 2024 में 12वीं का एग्जाम देने वाले हैं या सेंटअप एग्जाम देने वाले हैं, Important Question, BSEB EXAM

Bihar Board 12th History Top-5 Question 2024

Bihar Board 12th History Top-5 Question 2024: सभी स्टूडेंट 2024 में 12वीं का एग्जाम देने वाले हैं या सेंटअप एग्जाम देने वाले हैं, Important Question, BSEB EXAM

Bihar Board 12th History Top-5 Question 2024:

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Questions )

Q.1. प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन के विभिन्न स्रोतों का वर्णन करें। [2017, 2014, 2011]
Or प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन के पुरातात्विक स्रोतों का वर्णन करें।

Ans. मानव की विगत-विशिष्ट घटनाओं का ही दूसरा नाम इतिहास है। प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के साधन है-पुराण, इतिवृत, आख्यायिका, धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र आदि।
1. वेद : आर्यों का प्राचीनतम ग्रंथ वेद है। चारों वेद में इतिहास की सामग्री मिलती है।
2. रामायण एवं महाभारत : रामायण से तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त होता है। महाभारत के रचयिता व्यास है। महाभारत पुराने जमाने के धर्म, राजनीति एवं समाज पर प्रकाश डालता है।
3. पुराण एवं स्मृतियाँ इसके बाद पुराण आते है। इसकी संख्या 18 है। पुराणों में नंद, शुंग, कण्व, आन्ध्र तथा गुप्तवंशों की वंशावलियाँ प्राप्त होती है।
4. लौकिक साहित्य : ‘राजतरंगिनी’ को यदि भारतवर्ष का प्रथम महाग्रंथ कहा जाय तो अनुचित नही होगा। इसकी रचना 1149 ई0 में हुई थी।
5. अर्द्धऐतिहासिक ग्रन्थ : इनमें पाणिनी की ‘अष्टाध्यायी’ है जो एक ब्राह्मण ग्रन्थ होते हुए भी मोर्यो के पहले और बाद की राजनीतिक दशा पर प्रकाश डालता है।

6. जीवनियाँ : जीवनियों से भी काफी इतिहास मिलता है। वाणभट्ट के लिखे हुए ‘हर्षचरित’ में हर्ष के प्रारम्भिक जीवन एवं दिग्विजयों का वर्णन है। कालिदास के कई नाटको का अध्ययन कर सकते है। इनसे इतिहास का अच्छा परिचय मिलता है।

विदेशी यात्रियों का वर्णन:- भारतीय इतिहास की सामग्रियों को जुटाने में इतिहासकारों : का भी काफी सहयोग रहा है, जैसे—मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग आदि। अल्बेरुनी, जिसके समान भारतीय सभ्यता, संस्कृति और कला कौशल में रुचि रखने वाला शायद ही कोई दूसरा विदेशी था। पुरातात्विक सामग्री को भी तीन भागों में बाँटा जा सकता है-अभिलेख, स्मारक एवं मुद्राएँ।

(क) अभिलेख प्राचीन भारत के शिलाओं, धातुओं, गुफाओं आदि पर प्राचीन लोग ने जो लिख दिया है वह अमर है। किन्तु अशोक के पहले का कोई भी अभिलेख प्राप्त नहीं होता इसी प्रकार समुद्रगुप्त की प्रशस्तियों से उसके दिग्विजयों का वर्णन मिला है। (ख) स्मारक: प्राचीन स्मारक जो आज धरती के नीचे उत्खनन में प्राप्त किये गये इनसे इतिहास पर पूर्ण प्रकाश पड़ता है। इसका जीता-जागता उदाहरण विभिन्न प्रकार के नये भवन, राज प्रासाद, सार्वजनिक हॉल, बिहार, मठ, चैत्य, स्तूप, समाधि, मूर्ति, चित्रकारों आदि की असंख्य वस्तुओं में मिलता है।
मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाइयों ने हमारे सामने हजारों वर्ष पीछे का इतिहास उपस्थित कर इतिहास का एक नया परिच्छेद जोड़ दिया है। झांसी के देवगढ़ मंदिर, नालन्दा में बुद्धि की मूर्ति करना को स्पष्ट कर इतिहास के रिक्त अंग की पूर्ति करते है।

(ग) मुद्राएँ: भारतीय सम्राटों की मुद्राओं का भी कम महत्व नहीं है। मालय गणराज्यों एवं सातवाहन राजाओं का इतिहास मुद्राओं से ही प्रकाशित हुआ है। समुद्रगुप्त की मुद्राओं से है हम कह सकते हैं कि वह ब्राह्मण धर्म मानता था और वीणा एवं संगीत में रुचि रखता था। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि प्राचीन भारत के इतिहास के विभिन्न स्रोत है।

Q.2. हडप्पा सभ्यता की आधारभूत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [ 2018, 2017, 20157 (Give an account of the basic features of the Harappan civilization)
Ans. हड़प्पा सभ्यता का प्राचीन भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह विश्व की अत्यन्त प्राचीन एवं मानवोपयोगी सभ्यताओं में गिनी जाती है। अपने श्रेष्ठतम एवं मुनियोजित नगरों, सुव्यवस्थित निवास व्यवस्था, उत्तम नागरिक प्रबन्ध, सुन्दर और उपयोगी कलाओं आदि अनेक विशेषताओं के कारण हड़प्पा सभ्यता की गिनती विश्व की उन्नत और श्रेष्ठ सभ्यताओं में की जाती है। हड़प्पा सभ्यता की आधारभूत विशेषताएं हड़प्पा सभ्यता की आधारभूत विशेषताएं निम्नलिखित है-

1. कांस्य सभ्यता हड़णा-सभ्यता कांस्य कालीन सभ्यता थी। इसमें कांस्य काल की सर्वश्रेष्ठ विशेषताएं दिखाई देती है।
2. नगर-प्रधान सभ्यता हड़प्पा सभ्यता एक नगर-प्रधान सभ्यता थी। खुदाई से पता चलता है कि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो कभी बड़े ही विशाल तथा सुन्दर नगर थे। इसके अन्तर्गत हड़प्पा निवासियों ने आश्चर्यजनक उन्नति की थी। उन्हें नगरीय जीवन की अनेक सुविधाएँ प्राप्त थी। विशाल नगरों, पक्के भवनों, सुव्यवस्थित सड़कों, नालियों, स्नानागारों के निर्माता तथा सुद्ध शासन व्यवस्था के व्यवस्थापक हड़प्पा-निवासियों ने एक गौरवपूर्ण सभ्यता का निर्माण किया था।
3. व्यापार प्रधान सभ्यता: हड़प्पा सभ्यता व्यापार-प्रधान सभ्यता थी। उनका आन्तरिक एवं वैदेशिक व्यापार उन्नत अवस्था में था। उनके सुमेरिया, ईरान, मिस्र आदि अनेक देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित थे।

4. शान्ति प्रधान सभ्यता: हड़प्पा सभ्यता एक शान्ति प्रधान सभ्यता थी। हड़प्पा-निवा- सियों की युद्ध में रुचि नहीं थी। खुदाई में कवच, ढाल, टोप आदि हथियार नहीं मिले है तथा जो अन्य हथियार धनुष-वाण, भाले, कुल्हाड़ी आदि मिले है, उनका प्रयोग आत्म-रक्षा अथवा शिकार के लिए किया जाता था।
5. समष्टिवादिनी : हड़प्पा सभ्यता समष्टिवादिनी थी। हड़प्पा प्रदेश की खुदाई में राज सामग्री के स्थान पर सार्वजनिक सामग्री ही मिली है। विशाल सभा भवन, विशाल स्टेडियम तथा स्नानागारों के अवशेष हड़प्पा निवासियों के सामूहिक जीवन के परिचायक है।
6. सामाजिक एवं आर्थिक साम्य : लोकतंत्रीय एवं शान्ति-प्रधान सभ्यता होने के कारण इस सभ्यता में समानता का स्पष्ट आभास मिलता है। इसमें बहुत बड़ी सामाजिक तथा आर्थिक विषमता नहीं थी।
7. द्विदेवतामूलक सभ्यता हमा-निवासियों का धर्म द्विदेवतामूलक था। सिन्धुवासी परम पुरुष तथा नारी के उपासक थे। पुरुष और नारी के चिन्तन द्वन्द्व का यह सुन्दर दैवीकरण: हड़प्पा निवासियों की निश्चित कल्पना का प्रमाण है।
8. लिपि का ज्ञान हड़प्पा-निवासियों को लिपि का भी ज्ञान था जिसके माध्यम से वे अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते थे।
9. लिपि का ज्ञान हड़प्पा-निवासियों को लिपि का भी ज्ञान था जिसके माध्यम से वे अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते थे।
10. सुनियोजित नगर योजना : सुनियोजित नगरों का निर्माण हड़प्पा सभ्यता की एक आधारभूत विशेषता है। हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख नगरों-मोहनजोदडो, हड़प्पा, कालीबंगा आदि की नगर-योजना प्राय: समान है। प्रत्येक नगर के पश्चिम में एक ऊंचे चबूतरे पर गढ़ी या दुर्ग होता था तथा नीचे टीले पर मुख्य नगर होता था। गढ़ी के चारों ओर ईंटों से बनी हुई एक चहारदीवारी होती थी। यह सुरक्षा प्राचीर था।

Q.3. सिन्धु घाटी की नगर निर्माण की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें। [2012, 2014] Or. हड़प्पा संस्कृति की नगर योजना, भवन निर्माण एवं स्नानागार में क्या योगदान है? (What is contribution of Harappa culture in city planning architecturing, bathing pond ?)
Ans. सर जॉन मार्शल का विचार है कि यह सभ्यता लगभग पाँच हजार वर्ष पुरानी है। उनका कहना है कि मेसोपोटामिया और मिश्र जैसे देशों में कुछ ऐसे ही मिट्टी के बर्तन व मोहरे मिली है जो मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा के बर्तनों से मिलती-जुलती है।

(1) सुनियोजित नगर (Well-planned) : सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज से पता चलता है कि इस समय के लोग प्रायः नगरों में रहने वाले थे। नगर में बड़ी-बड़ी सड़क थी. जो एक दूसरे को समकोण पर काटती थी। ये सड़कें 4 मीटर से लेकर 10 मीटर तक चौड़ी थीं। बाजारों के दोनो ओर लगभग 25 मीटर से 35 मीटर तक चौड़ी गलियाँ थीं। डॉ० मैके के अनुसार सड़के इस प्रकार बनी हुई थी कि चलने वाली वायु एक सिरे से दूसरे सिरे तक गलियों अथवा सड़कों को स्वयं साफ कर दे।

(2) सुव्यवस्थित निकास व्यवस्था (Well-planned drainage) : सिन्धु घाटी सभ्यता के लोग सुव्यवस्थित एवं वैज्ञानिक ढंग से नालियों का प्रबन्ध करना जानते थे। उन्होंने नालियाँ खाड़ियाँ मिट्टी, चूने और एक प्रकार के सीमेंट से बनाई हुई थी। वे नालियों को खुला छोड़ना हानिकर समझते थे, अत: वे उन्हें ईटी से पाटते (ढकते थे। स्त्रियों को नालियों में राख और कूड़ा डालने पर पाबन्दी थी। वर्षा के पानी की निकासी का विशेष रूप से प्रबन्ध था। सारांश रूप में कहा जा सकता है कि उन लोगों का सफाई की ओर विशेष ध्यान था।

(3) निपुण नागरिक प्रबन्ध (Efficient civicadministration) : नगरों में हर प्रकार का प्रबन्ध लोगों की आवश्यकताओं व सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया जाता था। नगर में अच्छी नालियों के अलावा गलियों में प्रकाश का उचित प्रबन्ध किया जाता था। वर्तन पकाने वाली भट्टी नगर से बाहर होती थी जिससे नगर में प्रदूषण न फैले। यात्रियों के ठहरने के लिए सराय (मुसाफिरखाना) होता था। रात को नागरिकों की रक्षा के लिए पहरे का उचित प्रबन्ध था। कोई भी व्यक्ति अपने घर का कूड़ा नाली या गली में नहीं फेंकता था। कूड़ा नगर से बाहर गड्ढों में डाला जाता था। किसी का मकान निश्चित सीमा से आगे नहीं बनने दिया जाता था।

(4) भवन निर्माण कला (Architecture) : हड़प्पा की खुदाई से पता चलता है कि एक कमरे के मकान से लेकर बड़े-बड़े भवन तक बनाये जाते थे। ये भवन प्राय: तीन प्रकार के होते थे- (1) रहने का घर (2) पूजा गृह या पब्लिक हाल (सार्वजनिक महाकक्ष) । (3) सार्वजनिक स्नानागार। मकान प्रायः पक्की ईटों के थे और कई-कई मंजिल के होते थे। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ होती थी। मकानों में वायु धूप आने के लिए रोशनदान व खिड़कियों का प्रबन्ध था। प्रत्येक मकान में रसोईघर व स्नानघर अवश्य होता था। घर में एक कुआँ भी होता था। हड़प्पा के निवासियों के विषय में एक विशेष बात यह थी कि वे रोमन के निवासियों की तरह दिन में कई-कई बार स्नान करते थे।

सार्वजनिक भवनों में स्तम्भों वाला हाल और अन्न संग्रहालय विशेषकर उल्लेखनीय है। स्तम्भों वाला हाल 30 वर्ग फुट का और अन्न-संग्रहालय 200x 50 फुट का, जिसमें 50 x 20 वर्ग फुट के स्टोर (भण्डार) होते थे।

तीसरी प्रकार का भवन स्नानागार होता था जिसका आकार 180 x 180 वर्ग फुट होता था। इस स्नानागार का आन्तरिक आकार 29 × 23 x 8 फुट होता था। इसके चारों ओर बरामदे होते थे। स्नानागार को पानी से भरने के लिए एक कुंआ भी होता था। गन्दे पानी की निकासी के लिए भी प्रबन्ध था। अनुमान लगाया जाता है कि सार्वजनिक स्नानागार धार्मिक अवसरों पर सामूहिक रूप से नहाने के लिए होता था।

Q.4. हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों का वर्णन करें।
Ans. हड़प्पा सभ्यता के प्राचीन साक्ष्यों से पता चलता है कि अपने अस्तित्व के अन्तिम चरण में यह सभ्यता पतनोन्मुख रही। ई.पू. द्वितीय शताब्दी के मध्य तक यह सभ्यता पूर्णतः विलुप्त हो गई। हड़प्पा सभ्यता के काल एवं निर्माताओं की तरह ही इसके पतन को लेकर भी विभिन्न विद्वान एकमत नहीं है।

सर्वश्री मार्शल, मैके एवं एस आर सब हड़प्पा सभ्यता के पतन का एकमात्र कारण नदी की बाढ़ बताते है। चूँकि अधिकांश नगर नदियों के तट पर बसे हुए थे जिनमें प्रतिवर्ष बाद आती थी। मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा की खुदाइयों से पता चलता है कि इनका अनेक बार पुनर्निर्माण हुआ। मार्शल महोदय को मोहनजोदड़ो की खुदाई में प्रतिवर्ष बाद के कारण जमा हुई बालू की पर मिली है। मैके महोदय को चन्द्रदड़ो से बाढ़ के साक्ष्य मिले है। इसी प्रकार एस. आर. राव को भी लोगल, भागजाव आदि से भीषण बाढ़ के साक्ष्य मिले है। अतः इनका संयुक्त निष्कर्ष है कि बाद ही इस नगरीय सभ्यता के विनाश का प्रमुख कारण थी।

नदी में आने वाली बाद को यदि पतन का प्रमुख कारण माना जाये तो यह प्रश्न उठता है कि वे नगर जो नदियों के तटों पर अवस्थित नहीं थे, उनका पतन कैसे हुआ? अतः निश्चित ही इस सभ्यता के पतन के लिए कुछ अन्य कारण भी उत्तरदायी रहे होगे। इस तारतम्य में मार्टीमर व्हीलर, गार्डन चाइल्ड एवं पिगट आदि विद्वानों ने बाह्य आक्रमण को पतन का कारण माना है। पुरातात्विक साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि मोहनजोदड़ो को लूटा गया व वहाँ के लोगों की हत्या की गई। व्हीलर के अनुसार 1500 ई. पू. आर्यों ने आक्रमण कर हड़प्पा सभ्यता के नगरों को ध्वस्त किया एवं वहाँ के लोगों को मार डाला।
आरेन स्टाइन, ए. एन. घोष आदि विद्वान जलवायु परिवर्तन को हड़प्पा संस्कृति के विनाश का कारण मानते है। एम.आर. सहनी जैसे भूतत्व वैज्ञानिक जलप्लावन को इस सभ्यता के पतन का कारण मानते हैं।
माधोस्वरूप वत्स एवं एच.टी. लैम्बिक के अनुसार नदियों के मार्गों में हुआ परिवर्तन इस सभ्यता के पतन का कारण बना।
के. यू. आर. क्लेडी मलेरिया एवं महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को पतन का जिम्मेदार मानते है।

इस प्रकार उपर्युक्त सभी कारणों ने मिलकर हड़प्पा सभ्यता के नगरों का विनाश किया। इस तारतम्य में बी. बी. लाल का यह कथन काफी उपयुक्त प्रतीत होता है कि “जलवायु परिवर्तन, प्रदूषित वातावरण तथा व्यापार में आयी भारी गिरावट के फलस्वरूप हड़प्पा सभ्यता की समृद्धि समाप्त हो गई तथा नगरीकरण का अन्त हुआ।’

Q.5. सिन्धुघाटी सभ्यता के सामाजिक और धार्मिक जीवन पर प्रकाश डालें।

Ans. सामाजिक स्थिति : मोहनजोदड़ों तथा हड़प्पा की खुदाई से यह ज्ञात होता है कि सिन्धु घाटी की अधिकतर जनता खेती करती थी जो साधारणतया नगरों की चारदीवारी से बाहर रहती थी। वे गेहूं, जौ, मटर और कपास आदि की खेती करते थे। पशुपालन भी उनका एक मुख्य धंधा था। वे गाय, बैल, भैंस, बकरियाँ और संभवतः हाथी भी पालते थे। परन्तु ऐसा अनुमान है कि वे घोड़े और भेड़ के ज्ञान से अनभिज्ञ थे। कुछ लोग व्यापार भी करते थे। व्यापार विदेशों से भी किया जाता था। मेसोपोटामिया में सिधु घाटी से संबंधित अनेक चीजा (जैसे मोहरो) के मिलने में ऐसा अनुमान लगाया गया है कि सिन्धु घाटी के लोगों के मेसोपोटामिया से सीधे व्यापारिक सर्वध थे।

लोग ऊनी और सूतो दोनों प्रकार के वस्त्र पहनते थे। आभूषण स्त्रियों एवं पुरूषों दोनों को प्रिय थे। स्त्रियाँ केशकलाप और श्रृंगार आदि से भी परिचित थीं। बच्चे खिलौने से आनन्द प्राप्त करते थे जबकि बड़े संगीत, नृत्य, चौपड़ तथा पशु-पक्षियों की लड़ाइयों आदि से आनन्द उठाते थे। ऐसा लगता है कि सिन्धु घाटी के लोगों का भोजन बड़ा सादा था। गेहूं और दूध तथा दूध के पदार्थ उनके आहार के मुख्य अंग थे। लोग फल तथा सब्जियों आदि का प्रयोग भी करते थे।

धार्मिक स्थिति : हड़प्पा के प्राप्त प्रमाणों से पता चलता है कि सिन्धु घाटी के निवासी मूर्तिपूजक थे। कुछ पत्थर की आकृतियों मिली है, जो विद्वानों की सम्मति में लिग (Linga) और योनि (Yoni) की मूर्तियाँ है। इसके अतिरिक्त हड़प्पा और मोहनजोदड़ों में एक स्त्री के अनेक चित्र प्राप्त हुए हैं। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि यह सब पृथ्वी माता (Mother Goddess) के चित्र है। इसकी पूजा उस समय संसार के एक विस्तृत क्षेत्र में होती थीं। इस देवी के अतिरिक्त एक देवता की कुछ मूर्तियाँ मिली है। एक मूर्ति में उसके तीन मुँह दिखाए गए है और यह योगासन में बैठा है। इसके सिर के ऊपर दो सीग है। इस देव के दोनों ओर चार पशु-पक्षी, सिंह, बारहसिंगा और भैसा है। विद्वानों का ऐसा अनुमान है कि यह मूर्ति शिव-पशुपति (Shiva – Pashupati) की है। इन देवी-देवताओं के अतिरिक्त वे लोग वृक्षों में पीपल (Pipal), पक्षियों में फाख्ता (Dove), पशुओं में चीता, बकरी, मगरमच्छ, गैंडा और सर्प इत्यादि और कई अर्द्ध देवताओं (Semi-gods) की भी पूजा करते थे।

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